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गर्भपात (miscarriage) होने के कारण, लक्षण और इलाज

गर्भपात (miscarriage) होने के कारण, लक्षण और इलाज

गर्भपात (miscarriage) किसी भी महिला के लिए बेहद दुखद घड़ी होती है। क्योंकि एक शिशु को कुछ महीने पाल कर उसे खो देना काफी गम भरी घटना होती है। नवजात शिशु के जाने से पीड़ित महिला के लिए शारीरिक और मानसिक दोनों रूपो में पीड़ादाई और मुश्किल होता है। लेकिन अगर आपके पास गर्भपात (से संबंधित सारी जानकारी है तो ये आपको इस दर्द से उबरने में मदद करेगा।

गर्भपात क्या है? (What is Miscarriage)

सबसे पहले तो ये जान लेते हैं कि गर्भपात होता क्या है? दरअसल गर्भधारण से 24 सप्ताह पहले अगर शिशु की मृत्यु हो जाए तो इसे गर्भपात कहते हैं। इसके अलावा गर्भावस्था के शुरूआती 12 महीने से पहले अगर शिशु की मृत्यु हो जाए तो इसे अर्ली मिसकैरिज (miscarriage meaning in hindi) कहा जाता है।

गर्भपात के लक्षण (Miscarriage Symptoms)

गर्भपात(garbhpat) होने पर पीड़ित महिला को कई तरह के लक्षण महसूस होते हैं जिसमें से ब्लीडिंग होना सबसे नॉर्मल लक्षणों में से एक है। इसके अलावा भी गर्भपात के कई लक्षण हैं जैसे-

  • आमतौर पर गर्भपात का सबसे पहला लक्षण रक्तस्त्राव यानि ब्लीडिंग होता है, साथ ही पेट में मरोड़ और असहनिय दर्द होता है।
  • अगर आपका गर्भपात (miscarriage symptoms)गर्भावस्था के शुरुआती समय में ही हो जाता है तो इस दौरान ब्लीडिंग हल्का होगा और फिर कुछ दिनों में काफी ज्यादा हो सकता है इसमें पीड़ित महिला खून के थक्के बाहर आते हुए भी महसूस करती हैं जो कुछ दिनों तक आते ही रहते हैं।
  • कई गर्भवती (miscarriage)महिलाएं ऐसी भी होती हैं जिनमें गर्भावस्था के शुरुआती समय में ही कुछ खून के धब्बे दिखाई देते हैं लेकिन ज़रूरी नहीं कि ये गर्भपात ही हो, इस तरह की ब्लिडिंग हो जाती है जो कि 2 से 3 दिन तक चलती है।
  • प्रेग्नेंसी (miscarriage symptoms) के शुरुआत स्टेज में ब्लिडिंग, खून के धब्बे और दर्द होना मोलर गर्भावस्था के लक्षण हो सकते हैं, इसलिए जब भी आपको ऐसे संकेत दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें लपरवाही ना करें।
  • कुछ महिलाओं को पता भी नहीं चलता कि वो गर्भपात (garbhpat) की शिकार हो गई हैं और गर्भपात (miscarriage symptoms) हो जाता है। इस दौरान उन्हे किसी भी तरह के लक्षण महसूस नहीं होते हैं। इस स्थिति में गर्भ की जांच स्कैन के द्वारा ही की जाती है। इस तरह की घटना को मिस्ड मिस्कैरिज या साइलेंट मिस्कैरिज कहा जाता है।

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गर्भपात के कारण

गर्भपात (miscarriage) होने के कई कारण होते हैं जैसे खानपान का ध्यान ना रखना, पेट पर दबाव या चोट लगना और योनि में संक्रमण होना आदि महिलाओं में गर्भपात का कारण बन सकता है। इसके अलावा भी गर्भपात के कई कारण हैं जैसे-

  • अगर किसी महिला का गर्भपात (miscarriage causes) पहली तिमाही से पहले हो जाता है तो इसका कारण भ्रूण का विकास रुक जाना होता है।
  • कुछ महिलाओं में शुरुआती विकास के समय ही गर्भपात हो जाता है। क्योंकि गर्भावस्था का शुरुआती समय विकास की काफी नाजुक प्रक्रिया होती है इस दौरान कोई भी समस्या होने पर शिशु की मृत्यु का खतरा रहता है।
  • अगर गर्भपात (miscarriage causes) प्रेगनेंसी के बाद के चरण में हो जाता है तो इसके पीछे कारण गर्भवती महिला का स्वास्थ्य है। इस दौरान हुए गर्भपात को सहन कर पाना काफी दर्दनाक होता है। लेकिन अगर पहले ही बीमारी या जटिलताओं का पता लग जाए तो इस खतरे से बचा जा सकता है।
  • गर्भावस्था के समय अगर शुरुआती दिनों से ही डॉक्टर के संपर्क में रहा जाए और अच्छी चिकित्सकीय देखभाल लिया जाए तो गर्भपात का खतरा लगभग ना के बरारा होता है। इस स्थिति में एक स्वस्थ शिशु के जन्म की संभावना बढ़ जाती है।
  • काफी हद तक खानपान भी गर्भपात (miscarriage) का कारण हो सकता है। प्रेग्नेंसी के दौरान गर्भवती महिला को काफी तरह-तरह की चीज़ों का सेवन करने की इक्छा होती है जिसकी वजह से उनका खानपान असंतुलित हो जाता है और कुछ भी खा लेना शिशु के स्वास्थ्य के लिए खतर पैदा कर सकता है। इसलिए गर्भावस्था के समय किसी भी चीज़ का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रुर लें।
  • प्रेग्नेंसी (miscarriage meaning in hindi) के दौरान कई तरह की स्वास्थ्य समस्या हो जाती है जिसके लिए महिलाएं कुछ दवाइयों का सेवन कर लेती हैं जो गर्भपात का खतरा बढ़ा सकती हैं। इसलिए गर्भावस्था के समय किसी भी तरह की दवाइयों का सेवन हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1.क्या चीज खाने से गर्भपात हो जाता है?

खानपान (miscarriage causes) गर्भपात होने का सबसे बड़ा कारण है। गर्भवती महिला को पपीता नहीं खाना चाहिए, क्योंकि पपीता खाने से मिसकैरेज का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है। डॉक्टर की तरफ से पपीता उन महिलाओं को खाने की सलाह दी जाती है जिनके पीरियड्स रेगुलर नहीं आते हैं।

2.गर्भपात के बाद कितने दिन तक ब्लीडिंग होती है?

किसी भी तरह के गर्भपात के बाद लगभग दो सप्ताह तक ब्लीडिंग होती है। और दवाइयों के कारण हुए गर्भपात में करीब 9 दिनों तक ब्लीडिंग होती है।

3.अबॉर्शन में क्या होता है?

गर्भपात या अबॉर्शन वो अवस्था है जिसमें गर्भाशय के भीतर भ्रूण का विकास रुक जाता है और उसकी मृत्यु हो जाती है और गर्भावस्था की समाप्ति हो जाती है।

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